संधारित्र किसे कहते हैं ?, संधारित्र की धारिता, संचित ऊर्जा का सूत्र, समांतर प्लेट संधारित्र की धारिता का सूत्र ? धारिता को प्रभावित करने वाले कारक?, उपयोग

संधारित्र किसे कहते हैं ?


    संधारित्र किसे कहते हैं ?

    संधारित्र एक ऐसा समायोजन है, जिसमें किसी चालक के आकार में परिवर्तन किए बिना ही उसकी धारिता बढ़ायी जा सकती है (उसका विभव कम करके) जिससे कि उस पर आवेश की पर्याप्त मात्रा संचित की जा सके।

    संधारित्र प्रायः चालकों का एक जोड़ा होता है जो एक-दूसरे के समीप रखे रहते हैं। इनमें से एक को भूसम्पर्कित कर दिया जाता है।


    संधारित्र की परिभाषा क्या है?

    किसी भी आकृति के दो चालक जिन पर बराबर व विपरीत आवेश हो एवं एक दूसरे के समीप स्थित हो मिलकर संधारित्र का निर्माण करते है।


    संधारित्र की धारिता किसे कहते हैं?

    संधारित्र की किसी एक प्लेट को दिए गए आवेश q तथा उसकी दोनों प्लेटों के बीच उत्पन्न होने वाले विभवान्तर V के अनुपात को संधारित्र की धारिता कहते है।

     अर्थात् संधारित्र की धारिता C =` \frac{q}{v}` 


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    संधारित्र में संचित ऊर्जा

    किसी संधारित्र को आवेशित करने में किया गया कार्य उस संधारित्र में ऊर्जा के रूप में संचित हो जाता है इसे संधारित्र की संचित ऊर्जा कहते है।


    संधारित्र में संचित ऊर्जा का सूत्र

    यदि संधारित्र की धारिता C है एवं संधारित्र को Q आवेश दिया जाता है जिस कारण संधारित्र को प्लेटों के मध्य विभवांतर V हों जाता है तो संधारित्र में संचित कुल ऊर्जा 

                    U = `\frac1 2CV^2`

                    U = `\frac1 2QV`

                    U = `\frac{\ Q^2}{2C}`


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    समांतर प्लेट संधारित्र क्या है?

    दो समतल तथा समान्तर धातु की प्लेटों एवं उनके बीच स्थित विद्युतरोधी माध्यम से बने निकाय को समान्तर-प्लेट संधारित्र कहते हैं।


    समांतर प्लेट संधारित्र की धारिता का सूत्र क्या होता है?

    संधारित्र किसे कहते हैं ?

    माना `P_1` व `P_2` धातु की दो समतल प्लेटें हैं, जिनके बीच की दूरी d तथा प्रत्येक प्लेट का क्षेत्रफल A है। माना प्लेटों के बीच भरे माध्यम का पराविद्युतांक K है। जब प्लेट `P_1` को +q आवेश दिया जाता है तो प्लेट `P_2` पर प्रेरण के कारण - q आवेश उत्पन्न हो जाता है। चूँकि प्लेट `P_2` पृथ्वी से जुड़ी है इसीलिए इसके बाह्य तल का +q आवेश पृथ्वी से आने वाले इलेक्ट्रॉनों द्वारा निरावेशित हो जाता है। इस प्रकार प्लेटो `P_1` व `P_2` पर बराबर तथा विपरीत प्रकार के आवेश होंगे। अतः प्रत्येक प्लेट पर आवेश का पृष्ठ-घनत्व

                     σ = `\frac{\ q}{\ A}`

    प्लेटों के बीच किसी बिंदु पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता

                     E = `\frac{\sigma}{\Kε_0}` 

    σ का मान रखने पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता

                   E = `\frac{\q}{\Kε_0\ A}`


    माना दो प्लेटों के बीच विभवान्तर V हैं , तब प्लेटों के बीच विद्युत क्षेत्र की तीव्रता

                         E = `\frac{\ V}{\ d}`

                         V = E•d

    E का मान रखने पर 

                    V = `\frac{\qd}{\Kε_0\ A}`

    अत संधारित्र की धारिता C  =` \frac{q}{v}`    

             

    `\ C\=\frac{\K ε_0\ A}\d`

    अत उपर्युक्त सूत्र समांतर प्लेट संधारित्र की धारिता का सूत्र है।


    संधारित्र की धारिता को प्रभावित करने वाले कारक कौन से हैं?

    1 . प्लेटों के क्षेत्रफल A पर :- C ∝A अर्थात् धारिता प्लेटों के क्षेत्रफल के अनुक्रमानुपाती होती है। अतः संधारित्र की धारिता बढ़ाने के लिए प्लेटों का क्षेत्रफल A अधिक होना चाहिए अर्थात् प्लेटें बड़े क्षेत्रफल की लानी चाहिए।

    2. प्लेटों के बीच की दूरी d पर: -C ∝ 1 / d अर्थात् धारिता प्लेटों के बीच की दूरी के व्युत्क्रमानुपाती. होती है। अतः संधारित्र की धारिता बढ़ाने के लिए प्लेटों के बीच की दूरी d कम होनी चाहिए अर्थात् प्लेटें एक-दूसरे के समीप रखनी चाहिए।

    3. प्लेटों के बीच के माध्यम पर: - C ∝ K अर्थात् धारिता माध्यम के पराविद्युतांक के अनुक्रमानुपाती होती हैं; अत: संधारित्र की धारिता बढ़ाने के लिए प्लेटों के बीच ऐसे माध्यम अर्थात् पदार्थ रखना चाहिए जिसका परविद्युतांक (K) अधिक हो ।


    संधारित्र के उपयोग

    संधारित्र का उपयोग विभिन्न प्रकार से किया जाता है।

    1. विद्युत उपकरणों में संधारित्र का प्रयोग प्रारंभिक बलाघूर्ण देने में किया जाता है। 

    2. ऊर्जा का संचय करने में संधारित्र का उपयोग किया जाता हैं।


    कुछ अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न 

    Ques1. समानांतर प्लेट संधारित्र में दूसरी प्लेट का क्या कार्य है?

    Ans . संधारित्र की दूसरी प्लेट का कार्य, प्लेटों का आकार स्थिर रखते हुए पहली प्लेट के विभव को कम करना है, जिससे कि उसे अधिक आवेश दिया जा सके तथा धारिता बढ़ाई जा सके।

    Ques 2. समांतर प्लेट संधारित्र का सूत्र क्या है?

    Ans. `\ C\=\frac{\K ε_0\ A}\d`

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