प्रतिरोध, अनुगमन वेग, विशिष्ट प्रतिरोध, चालकता, विशिष्ट चालकता, सूत्र

धातुओं में मुक्त इलेक्ट्रॉन आदर्श गैस के प्रत्यास्थ अणुओं की तरह व्यवहार करते हैं। इसी कारण इनके समूह को इलेक्ट्रॉन गैस कहा जाता है। ये मुक्त इलेक्ट्रॉन धातु के स्थिर आयनों के बीच के खाली स्थान में उच्च ऊष्मीय वेग (= `10^5 `m/s ) से अनियमित गति करते रहते हैं। गति के दौरान मुक्त इलेक्ट्रॉन, धन आयनों से लगातार टकराते रहते हैं, जिसके कारण इनकी गति की दिशा बदलती रहती है। 



    माध्य मुक्त पथ किसे कहते हैं (mean free path)

    "किसी मुक्त इलेक्ट्रॉन द्वारा दो टक्करों के बीच चली गई माध्य दूरी इलेक्ट्रॉन का माध्य मुक्त पथ  (Mean Free Path) कहलाती है।

     

    श्रान्तिकाल की परिभाषा (relaxation time)

    "दो क्रमागत टक्करों के बीच लगे माध्य समयान्तराल को श्रांतिकाल (Relaxation time) कहते है।”अधिकांश धातुओं के लिए माध्य मुक्त पथ `10^-9`m की कोटि का होता है।

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    अनुगमन वेग किसे कहते हैं (drift velocity)

    "जब किसी धातु के तार को एक बैटरी से जोड़कर उसके सिरों के बीच विभवान्तर स्थापित करते हैं तो मुक्त इलेक्ट्रॉन तार की लम्बाई की दिशा में उच्च विभव वाले सिरे की ओर एक औसत वेग से अनुगमन करते हैं। इस औसत वेग को इलेक्ट्रॉनों का अपवाह वेग कहते हैं।" इसे '`V_d'` से प्रदर्शित करते हैं।


    विद्युत धारा तथा अनुगमन वेग में संबंध (Relation between Electric Current and Drift Velocity)

    माना किसी चालक तार में i ऐम्पियर की विद्युत-धारा बह रही है। यदि t सेकण्ड में तार के परिच्छेद में से गुजरने वाले मुक्त इलेक्ट्रॉनों द्वारा प्रवाहित आवेश q हो तो


    प्रवाहित विद्युत धारा: (i) = `\frac{\ q}{\ t}`


    माना तार के अनुप्रस्थ परिच्छेद का क्षेत्रफल A, उसके प्रति एकांक आयतन में मुक्त इलेक्ट्रॉनों की संख्या n तथा इलेक्ट्रॉनों का अपवाह वेग `V_d` है तो



    1 सेकण्ड में तार के किसी अनुप्रस्थ परिच्छेद में से गुजरने वाले इलेक्ट्रॉनों की संख्या 


                          = nAVd


    चूंकि t सेकण्ड में तार के किसी अनुप्रस्थ परिच्छेद में से गुजरने वाले इलेक्ट्रॉनों की संख्या

                        = (nAVd) × t


    अतः t सेकण्ड में तार के किसी अनुप्रस्थ परिच्छेद में से गुजरने वाले आवेश की मात्रा

                      q = (nAVdt) × e


    q का मान समीकरण (1) में रखने पर : 


                        i = neAVd

     यही विधुत धारा तथा अपवाह वेग में संबंध है ।

    यह भी पढ़े: विधुत धारा किसे कहते हैं।


    उपरोक्त समीकरण से स्पष्ट होता है कि:

    (1) धारा का मान अपवाह वेग के समानुपाती होता है।

    अर्थात् i ∝ Vd

    (2) असमरूप काट के चालक मे कम काट के क्षेत्रफल के भाग में इलेक्ट्रोनो का अपवाह वेग अपेक्षाकृत अधिक तथा अधिक काट के क्षेत्रफल के भाग में इलेक्ट्रोनो का अपवाह वेग कम होता है ताकि चालक में धारा का मान नियत रहे। 

    (3) धारा का मान इलेक्ट्रोनो की संख्या के समानुपाती होता है।

    अर्थात् i ∝ n (जितने ज्यादा इलेक्ट्रॉन होंगे उतनी ज्यादा धारा प्रवाहित होगी)


    अनुगमन वेग तथा धारा घनत्व में संबंध (Relation between Current Density and Drift velocity)

    चूंकि हम जानते है धारा घनत्व (J) = `\frac{\ i}{\A}`


    चूंकि विधुत धारा तथा अपवाह वेग में संबंध 

         (i) = neAVd

           


    यही धारा घनत्व व अपवाह वेग में संबंध है।

    यह भी पढ़े: धारा घनत्व किसे कहते है?


    प्रतिरोध किसे कहते हैं (what is resistance)

    “जब किसी चालक के सिरों के बीच विभवान्तर स्थापित किया जाता है तो चालक में विद्युत धारा बहने लगती है, तब विभवान्तर (V) तथा धारा (i) के अनुपात को उस चालक का विद्युत प्रतिरोध कहते हैं।" 

    या किसी चालक का वह गुणधर्म जो चालक में विद्युत धारा प्रवाह का अवरोध करता है विद्युत प्रतिरोध कहलाता है। इसे R से प्रदर्शित करते हैं।

          

        विद्युत प्रतिरोध R = `\frac{\ V}{\ i}`


    प्रतिरोध का मात्रक ओम(Ω) है। इसका बड़ा मात्रक मेगा ओम तथा अत्यंत छोटा मात्रक माइक्रो ओम है। 

    1 मेगा ओम = `10^6` ओम

    1 माइक्रो ओम = `10^-6` ओम


    प्रतिरोध का विमीय सूत्र 

             R = `\frac{\ V}{\ i}`

             = `\frac{\ W}{\ q×i}`

             = `\frac{\ Fd}{\ i^2t}`

             = `\frac{\ mad}{\ i^2t}`


    अतः प्रतिरोध R का विमीय सूत्र 

        = `[ML^2T^-3A^-2]`


    SI पद्धति में प्रतिरोध का मात्रक

    `Kgm^2s^-3A^-2`


    चालकता किसे कहते हैं (Conductivity)

    विद्युत चालकता : विद्युत प्रतिरोध के व्युत्क्रम को विद्युत चालकता कहते है। इसका मात्रक `ओम^-1` अथवा म्हो हैं। 


    विशिष्ट प्रतिरोध किसे कहते हैं (specific resistance)

    "जब किसी चालक तार में धारा प्रवाहित की जाती है तो चालक-तार के भीतर किसी बिन्दु पर विद्युत-क्षेत्र की तीव्रता (E) तथा धारा-घनत्व (J) के अनुपात को चालक के पदार्थ का विशिष्ट प्रतिरोध अथवा प्रतिरोधकता कहते हैं।" इसे ρ से प्रदर्शित करते हैं।


    अत ρ = `\frac{\ E}{\ J}`


    इसका मात्रक ओम-मीटर है तथा यह चालक के पदार्थ का लाक्षणिक गुण है अर्थात् इसका मान चालक के आकार पर निर्भर नहीं करता।


    माना किसी चालक - तार की लम्बाई l तथा अनुप्रस्थ-परिच्छेद का क्षेत्रफल A है। माना चालक-तार के सिरों के बीच विभवान्तर V लगाने पर इसमें धारा i प्रवाहित होती है। इस स्थिति में, चालक-तार के सभी बिन्दुओं पर धारा-घनत्व J तथा विद्युत क्षेत्र की तीव्रता E का मान नियत रहता है।


    चालक तार के भीतर किसी बिन्दु पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता E = `\frac{\ V}{\ i}`

    चूंकि हम जानते है धारा घनत्व (J) = `\frac{\ i}{\ A}`


    अत विशिष्ट प्रतिरोध के सूत्र से


    ρ = `\frac{\ E}{\ J}`

    = `\frac{\VA}{\ il}`

    ρ = R `\frac{\ E}{\ J}`


    जहां`\frac{\ V}{\ i}` चालक का प्रतिरोध R है।

    यदि तार की लम्बाई l = 1m तथा अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल A = 1`m^2` हो तब

                       ρ = R


    अतः किसी पदार्थ के एकांक लम्बाई व एकांक अनुप्रस्थ-परिच्छेद वाले तार के प्रतिरोध को उस पदार्थ का विशिष्ट प्रतिरोध कहते हैं।


    विशिष्ट प्रतिरोध का विमीय सूत्र

    ρ = `R\frac{\ A}{\ l}`


     R की विमा × A की विमा / l की विमा


    = `[ ML^3T^-3A^-2]`


    विशिष्ट चालकता (Specific Conductance) 

    "किसी पदार्थ के विशिष्ट प्रतिरोध के व्युत्क्रम को उस पदार्थ की विशिष्ट चालकता कहते हैं।" इसे σ से प्रदर्शित करते हैं। इसका मात्रक `ohm^-1metre^-1` है।


    विशिष्ट चालकता का सूत्र

     σ = 1/ρ

    विशिष्ट प्रतिरोध की परिभाषा से 

    ρ = E/J


    तब σ = J/E

    J = σE


    विशिष्ट चालकता का विमीय सूत्र

    `[M^-1L^-3T^3A^2]`

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