विद्युत सेल किसे कहते हैं, विद्युत वाहक बल, सेल का टर्मिनल विभवांतर, आंतरिक प्रतिरोध।

विद्युत सेल, विद्युत वाहक बल, विभवांतर
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हेलो मेरे प्रिय दोस्तो आज का आर्टिकल अत्यंत महत्वपूर्ण होने वाला है जिसमे की हम कक्षा 12th के विद्युत धारा अध्याय के परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण टॉपिक्स विद्युत सेल किसे कहते हैं, विधुत वाहक बल, टर्मिनल विभवांतर तथा आंतरिक प्रतिरोध के बारे में विस्तारपूर्वक तथा सरल भाषा में अध्यन करने वाले है।




    विद्युत सेल का आविष्कार किसने किया?

    अलेसांद्रो वोल्टा (Alessandro Volta) एक इटालियन वैज्ञानिक थे जिन्होंने सन् 1800 में सर्वप्रथम बैटरी (विधुत सेल) का आविष्कार किया था।


    विद्युत सेल किसे कहते हैं?

    विद्युत सेल एक ऐसी युक्ति है जो रासायनिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलकर, किसी परिपथ में आवेश (अथवा धारा) के प्रवाह को निरन्तर बनाए रखती है।"


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    सेल का विद्युत वाहक बल है (what is emf of a cell)

    जब किसी सेल को बाह्य परिपथ से जोड़ा जाता है, तो बाहा परिपथ में विद्युत् धारा सेल के धन इलेक्ट्रोड से ऋण इलेक्ट्रोड की ओर तथा सेल के अन्दर ऋण इलेक्ट्रोड से धन इलेक्ट्रोड की ओर प्रवाहित होती हैं

    किसी भी विद्युत परिपथ में विद्युत धारा के प्रवाह को बनाये रखने के लिए ऊर्जा व्यय करनी पड़ती है। 

    यह ऊर्जा सेलों के रासायनिक क्रिया के फलस्वरूप उत्पन्न होती है।

    "एकांक आवेश को पूरे विद्युत् परिपथ में प्रवाहित करने पर जितनी ऊर्जा व्यय होती है, उसे सेल का विद्युत् वाहक बल कहते हैं।"

    विद्युत वाहक बल को संक्षिप्त में वि•वा•ब• (emf) कहते है।


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    विद्युत वाहक बल को इस प्रकार भी परिभाषित कर सकते है: -

    "एकांक आवेश को सेल सहित पूरे परिपथ में प्रवाहित कराने में सेल द्वारा किए गए कार्य अथवा सेल द्वारा दी गई ऊर्जा को सेल का विद्युत वाहक बल कहते हैं। इसे 'E' से प्रदर्शित करते हैं।"


    यदि किसी परिपथ में q आवेश प्रवाहित करने पर सेल द्वारा किया गया कार्य अथवा सेल द्वारा दी गई ऊर्जा W है तो सेल का विद्युत वाहक बल,

                             E =`\frac{\mathbf W}{\mathbf q}`


    मात्रक

    SI पद्धति में विद्युत वाहक बल (emf) का मात्रक वोल्ट (Volt) होता है। इसे V से प्रदर्शित करते है।


    सूत्र : E = W/q से

    यदि W = 1 जूल तथा q = 1 कूलाम हो तो E = 1 वोल्ट होगा 

           अर्थात् 1 वोल्ट = 1 जूल/ 1 कूलाम 


    अत: यदि किसी विद्युत परिपथ मे 1 कूलाम आवेश को गति करने में लिए 1 जूल ऊर्जा की आवश्यकता होती है तो उस परिपथ का विद्युत वाहक बल (emf) 1 वोल्ट होगा।

    जब सेल खुले परिपथ में होता है तो उसके दोनों इलेक्ट्रोडों के बीच विभवान्तर सेल के विद्युत वाहक बल के बराबर होता है। सेल के भीतर सेल का विद्युत वाहक बल ऋण इलेक्ट्रोड से धन इलेक्ट्रोड की ओर दिष्ट होता है।

    नोट :  विद्युत वाहक बल प्रत्येक सेल का लाक्षणिक गुण होता है, जिसका मान सेल में प्रयुक्त इलेक्ट्रोडों तथा विद्युत-अपघट्य की प्रकृति पर निर्भर करता है। विद्युत अपघट्य की मात्रा तथा इलेक्ट्रोडों के आकार अथवा उनके बीच की दूरी का इस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।


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    सेल का टर्मिनल विभवांतर 

    जब सेल बंद परिपथ मे होता है अर्थात् जब सेल से धारा ली जाती है तो किसी परिपथ के किन्ही दो बिंदुओ के बीच एकांक आवेश को प्रवाहित करने में किए गए कार्य को सेल के सिरों के बीच विभवान्तर कहते हैं। इसे V से प्रदर्शित करते हैं।


    विभवांतर का SI मात्रक भी वोल्ट होता है। इसे वोल्टमीटर द्वारा मापते है।


    सेल का आंतरिक प्रतिरोध

    "बन्द परिपथ में सेल द्वारा विद्युत धारा भेजते समय विद्युत धारा सेल के भीतर उसके घोल में ऋण प्लेट से धन प्लेट की ओर बहती है। इस धारा के लिए सेल के घोल के प्रतिरोध को सेल का आन्तरिक प्रतिरोध कहते हैं। इसे "r "से प्रदर्शित करते हैं। इसका मात्रक ओम (Ω) है।


    सेल का आंतरिक प्रतिरोध किन बातों पर निर्भर करता है?

    सेल के आन्तरिक प्रतिरोध का मान निम्नलिखित बातों पर निर्भर करता है-

    (1) यह सेल की दोनों प्लेटों के बीच की दूरी के अनुक्रमानुपाती होता है। अर्थात् सेल की प्लेटे एक दूसरे से जितनी दूरी पर होंगी सेल का आन्तरिक प्रतिरोध उतना अधिक होगा।

    (2) यह घोल में डूबे हुए प्लेटों के क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती होता है। अर्थात् प्लेटों का क्षेत्रफल जितना अधिक वैद्युत अपघट्य के घोल में डूबा होगा सेल का आन्तरिक प्रतिरोध उतना कम होगा।

    (3) यह वैद्युत अपघट्य के घोल की सान्द्रता के अनुक्रमानुपाती होता है। 

    (4) यह वैद्युत अपघट्य एवं प्लेटों के पदार्थ की प्रकृति पर निर्भर करता है। 

    सेल का आन्तरिक प्रतिरोध नियत नहीं रहता बल्कि इसका मान सेल के उपयोग करते रहने से धीरे-धीरे बढ़ता जाता है।


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    विद्युत वाहक बल तथा विभवांतर में अंतर

     क्र• सं• विद्युत वाहक बल टर्मिनल विभवांतर
    01 एकांक आवेश को पूरे परिपथ में चक्रित कराने में सेल द्वारा दी गई ऊर्जा को सेल का वैद्युत वाहक बल कहते हैं। एकांक आवेश को बाह्य परिपथ में चक्रित कराने में सेल द्वारा व्यय की गई ऊर्जा को सेल का टर्मिनल
    विभवान्तर कहते हैं।
    02 वैद्युत वाहक बल एक दिए गए सेल के लिए नियत होता है। टर्मिनल विभवान्तर सेल से ली गई धारा पर निर्भर करता है
    03  विद्युत वाहक बल पर सेल की आंतरिक प्रतिरोध का प्रभाव पड़ता है। जबकि विभवांतर पर सेल के आंतरिक प्रतिरोध का कोई भी प्रभाव नहीं पड़ता है।
    04 खुले परिपथ में सेल के दोनों धूर्वो के बीच के विभवांतर को सेल का विद्युत वाहक बल कहते हैं। जबकि बंद परिपथ में सर के दोनों धुर्वो के युवाओं के अंतर को भी वादा करते हैं


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